तस्वीरों में संकट मोचन संगीत समारोह, कला का अद्भुत संगम
वाराणसी। संकट मोचन संगीत समारोह के 103वें साल में पहली बार तुलसीदास और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के पदों के साथ बनारस की रामलीला परंपरा और शास्त्रीय संगीत का एक साथ संयोग हुआ। नृत्य नाटिका चित्रकूट के मंचन में निराला की लिखी कविता राम की शक्ति पूजा पर राम और दुर्गा के भाव ने हनुमान भक्तों को भावुक कर दिया। नाटक का रूप देने वाले रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल ने 45 मिनट में अयोध्या-मिथिला से लेकर रावण युद्ध और सीता हरण, जटायु संग्राम सहित चार अध्यायों को अपने निर्देशन में मंच पर उतारा।रावण की ओर से युद्ध लड़ रहीं मां दुर्गा को खुश करने के लिए भगवान राम जब 108 कमल फूल चढ़ा रहे थे तो 108वां फूल मां दुर्गा गायब कर भगवान की परीक्षा लेने लगीं। तब भगवान राम अपने नीलकमल सी आंख में तीर मारने बढ़े ही थे कि मां दुर्गा ने उन्हें रोक लिया।
इस कथा के 11 पात्रों को सात अभिनेता और अभिनेत्रियों ने मंच पर जीवंत किया। राम की भूमिका में स्वाति और नंदिनी सीता व दुर्गा बनीं। साखी को लक्ष्मण, हनुमान और जटायु के रूप में तापस और रावण थे। मारीच जैसे पात्रों में आकाश और शाश्वत ने अभिनय किया। जेपी शर्मा और आशीष मिश्र के संगीत संयोजन और स्वर्गीय डॉ. शकुंतला शुक्ल की परिकल्पना रही।
दो पद्म विभूषण के पुत्रों ने संतूर और तबले पर निकाली पहाड़ी धुन
संकट मोचन संगीत समारोह की दूसरी प्रस्तुति दो बड़े पद्मविभूषण संगीतसाधकों के पुत्रों की रही। मुंबई से आए पं. शिवकुमार शर्मा के बेटे पं. राहुल शर्मा के साथ संतूर पर पं. छन्नूलाल मिश्र के बेटे पं. राम कुमार मिश्र ने तबले पर शानदार तालमेल किया। राग गोरख कल्याण आलाप जोड़ और झाला प्रस्तुत किया।
धुन पहाड़ी में कश्मीरी शास्त्री राग बजाकर हनुमत दरबार के सुधि श्रोताओं को हिमालयी वादियों में लेकर चले गए। पहाड़ी की चढ़ाई की तरह से ही शुरुआत का 30 मिनट धीमा रहा, उसके बाद संतूर के तार और तबले की थाप ने तेजी पकड़ी और अंत के 15 मिनट में लगा कि संगीत की धारा कल-कल करते हुए पहाड़ी से नीचे उतर गई हो।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी नृत्यांगना के पंजे की नसों ने भी किया कथक
तीसरी प्रस्तुति लेकर दिल्ली से आईं बनारस घराने की कथक नृत्यांगना विधा लाल ने शंभू शिव शंभू स्वयंभू.... कदमों को शास्त्रीय थिरकन देना शुरू किया। उनके पग घुंघुरुओं की छमछमाहट संगत में बज रहे तीन-तीन तबलों की थाप पर कभी बखूबी ताल से ताल मिलाती रहीं तो कभी उन पर भारी पड़ गईं।
नृत्यांगना विदुषी सितारा देवी की शिष्या और गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्डधारी विधा लाल ने तीन ताल में पारंपरिक कथक की प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने अपना नृत्य अपने गुरु विदुषी सितारा देवी को समर्पित किया।
तबले की थाप कई बार तो मृदंगम जैसी बजी और आंजनेय पुत्र की हर एक कथा और भजन को उन्होंने अपने कथक में समेट दिया। जय-जय राम-राम से उन्होंने अपनी प्रस्तुति से कथक को विराम दिया। तबले पर पंडित उदय शंकर मिश्र, संवादिनी पर मोहित साहनी, सितार पर सिद्धांत चक्रवर्ती और सारंगी पर अंकित मिश्र ने संगत की।
चित्रकूट नृत्य-नाटिका...15 दिन, छह-छह घंटे का अभ्यास
संकट मोचन संगीत समारोह के पहले दिन मंदिर परिसर भक्ति और कला के अद्भुत संगम का साक्षी बना। कार्यक्रम की शुरुआत चित्रकूट नृत्य-नाटिका के मंचन से हुई, जिसने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। सात कलाकारों की टीम ने अपने सशक्त अभिनय, भाव-भंगिमा और समन्वित प्रस्तुति से पूरे वातावरण को राममय कर दिया। टीम ने लगभग 15 दिनों तक छह-छह घंटे तक इसका अभ्यास किया था।
मंचन के दौरान जैसे ही राम-सीता और हनुमान से जुड़े प्रसंगों का चित्रण हुआ, पूरा संकट मोचन मंदिर परिसर जय श्रीराम और जय हनुमान के उद्घोष से गूंज उठा। कलाकारों की अभिव्यक्ति इतनी सजीव थी कि दर्शक खुद को कथा के साथ जुड़ा हुआ महसूस करने लगे।
इस नृत्य-नाटिका में सीता की भूमिका नंदिनी ने निभाई, जबकि भगवान राम का किरदार स्वाति ने सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। स्वाति की प्रस्तुति विशेष रूप से सराही गई, क्योंकि वह उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित कलाकार हैं। उनकी भाव-भंगिमा और संवाद अदायगी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जटायु की भूमिका में तापसे ने अपने अभिनय से गहरी छाप छोड़ी। वहीं, विशाल, आकाश, शाश्वत, साखी और जयंती ने भी अपने-अपने किरदारों को जीवंत करते हुए मंचन को प्रभावशाली बनाया। सभी कलाकारों के सामूहिक प्रयास ने प्रस्तुति को अत्यंत मनोहारी और यादगार बना दिया।
कार्यक्रम का संचालन नागरिप्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ला ने किया। उन्होंने मंच से कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। संकट मोचन संगीत समारोह का यह पहला दिन ही यह संकेत देने के लिए पर्याप्त रहा कि आने वाले दिनों में भी कला, संगीत और भक्ति का यह महोत्सव दर्शकों को इसी तरह मंत्रमुग्ध करता रहेगा। मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों की भीड़ ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
मालिनी अवस्थी की किताब ‘चंदन किवाड़’ पर आधारित पेंटिग ने लोगों का किया आकर्षित
संकट मोचन संगीत समारोह में आयोजित पेंटिंग प्रदर्शनी में इस बार कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में सजी इस प्रदर्शनी में स्थानीय और युवा कलाकारों ने अपनी सृजनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का मन मोह लिया।इस प्रदर्शनी की सबसे खास प्रस्तुति रही ‘चंदन का किवाड़’ नामक पेंटिंग, जिसे औसानगंज के युवा कलाकार ऋतिक जायसवाल ने तैयार किया है। 36 बाय 49 इंच की इस भव्य पेंटिंग को बनाने में उन्होंने लगभग 200 घंटे का समय लगाया।
महज छह रंगों के संयोजन से बनी यह कलाकृति अपनी बारीकियों और आध्यात्मिक भावभूमि के कारण दर्शकों को खासा प्रभावित कर रही है। ऋतिक ने अपनी इस कृति को पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी की चर्चित पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ को समर्पित किया है, जिससे इसकी सांस्कृतिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।
वहीं, लंका क्षेत्र की हर्षिता द्वारा बनाई गई ‘पवन पुत्र’ पेंटिंग भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। इस चित्र में हनुमान जी के वीर और भक्तिमय स्वरूप को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया है, जो दर्शकों को रुककर देखने पर मजबूर कर देता है। पांडेयपुर की शैलजा गुप्ता ने ‘लंका दहन’ शीर्षक से बनाई अपनी पेंटिंग मात्र तीन घंटे में तैयार की, लेकिन उसकी प्रस्तुति और रंग संयोजन ने उसे बेहद प्रभावशाली बना दिया।
इसके अलावा बीआर फाउंडेशन की पूनम राय ने भी हर वर्ष की तरह इस बार अपनी चित्रकारी के माध्यम से हनुमत दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी कलाकृतियों में भक्ति और सौंदर्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
प्रदर्शनी में अनुष्का मौर्य, स्नेहा राय, विनेक्षा राय, जीवा, संजीवनी, रिजवान खान, तरंजीत कौर, ममता मल्होत्रा और प्रियंका प्रियदर्शिनी जैसे कलाकारों ने भी अपनी-अपनी चित्रकृतियों से दर्शकों को खूब आकर्षित किया। कुल मिलाकर, इस पेंटिंग गैलरी ने संकट मोचन संगीत समारोह में कला के एक और रंग को जोड़ते हुए इसे और भी समृद्ध बना दिया है, जहां भक्ति, संस्कृति और सृजनात्मकता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

