गायब हुए तो बॉस जिम्मेदार, नगर निगम में सख्ती शुरू
जबलपुर: नगर पालिक निगम में प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने और कार्यसंस्कृति में बड़ा सुधार लाने के लिए एक बेहद सख्त रुख अपनाया गया है। अब उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर बड़ी गाज गिरने वाली है जो अक्सर फील्ड वर्क या किसी अन्य सरकारी काम का बहाना बनाकर कार्यालयीन समय में अपनी कुर्सी से नदारद रहते हैं। प्रशासन ने इस गंभीर समस्या से पार पाने के लिए जवाबदेही की नई नियमावली तैयार की है, जिसके अंतर्गत यदि कोई भी मुलाजिम बिना किसी पूर्व सूचना के दफ्तर से गायब पाया जाता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर उसके विभाग के कार्यालय प्रमुख को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन्हें हर महीने अपने पूरे स्टाफ की उपस्थिति का पूरा लेखा-जोखा उच्चाधिकारियों को सौंपना होगा।
अत्याधुनिक तकनीकी हाजिरी और वेतन भुगतान की नई प्रणाली
जबलपुर सहित मध्य प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में अब पुरानी और पारंपरिक व्यवस्था को पूरी तरह बदलकर डिजिटल तकनीक का समावेश किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत सभी कर्मचारियों के लिए बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली के माध्यम से अपनी दैनिक हाजिरी दर्ज करना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई भी कर्मी इस डिजिटल सिस्टम पर अपनी उंगलियों के निशान, चेहरे या आंखों की पुतली को स्कैन करवाकर हाजिरी नहीं लगाता है, तो उसे उस दिन के लिए अनुपस्थित ही माना जाएगा और विभागीय पोर्टल पर जब तक उसकी उपस्थिति का डेटा संबंधित विभाग प्रमुख द्वारा प्रमाणित करके अपडेट नहीं किया जाता, तब तक उसका मासिक वेतन पूरी तरह से रोक दिया जाएगा।
कागजी रजिस्टरों की मनमानी और फर्जीवाड़े पर पूर्ण विराम
इस नई और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से बरसों से चले आ रहे कागजी रजिस्टरों के खेल और उसमें होने वाली हेराफेरी पर पूरी तरह से लगाम लग जाएगी। अक्सर यह देखा जाता था कि दफ्तर देर से आने वाले या गायब रहने वाले कर्मचारियों की हाजिरी पिछले समय में दर्ज कर दी जाती थी, जिससे सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन होता था। निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने इन विसंगतियों को भांपते हुए स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि सभी कर्मचारियों को निर्धारित समय पर ही दफ्तर आना होगा और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपनी रीयल-टाइम उपस्थिति दर्ज करानी होगी ताकि कामकाज में किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़ा न हो सके।
निगमायुक्त का औचक शिकंजा और फील्ड ड्यूटी की सख्त निगरानी
जबलपुर नगर निगम में कामकाज की गति को तेज करने और पारदर्शिता लाने के लिए निगमायुक्त ने खुद कमान संभालते हुए अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। फील्ड ड्यूटी के नाम पर दफ्तर से बाहर जाने वाले कर्मचारियों की अब न केवल भौतिक रूप से जांच की जाएगी बल्कि उनके द्वारा किए गए काम की रीयल-टाइम समीक्षा भी होगी। यदि किसी औचक निरीक्षण के दौरान विभाग में सन्नाटा मिलता है या कर्मचारी गायब पाए जाते हैं, तो विभाग प्रमुख को सीधे कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा, जिसका असर अब निगम के गलियारों में साफ दिखने लगा है और फाइलों के निपटारे में तेजी आई है।

